बिहार में चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के इस आदेश को चुनौती दी गई है। आयोग के खिलाफ ये याचिका एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने दाखिल की है। इस याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग का ये आदेश मनमाना है। इससे लाखों मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में दखल देने की भी मांग की गई है।
आधार और राशन कार्ड जैसे सामान्य पहचान दस्तावेजों को बाहर करके, यह प्रक्रिया हाशिए पर पड़े समुदायों और गरीबों पर असंगत रूप से प्रभाव डालती है, जिससे उनके बाहर होने की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा, SIR प्रक्रिया के तहत मतदाताओं के लिए न केवल अपनी नागरिकता साबित करने के लिए बल्कि अपने माता-पिता की नागरिकता साबित करने के लिए भी दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता अनुच्छेद 326 का उल्लंघन करती है। इन आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहने पर उनके नाम मसौदा मतदाता सूची से बाहर किए जा सकते हैं या यहां तक कि उन्हें पूरी तरह से हटा दिया जा सकता है।
ECI ने बिहार में SIR को लागू करने के लिए एक अनुचित और अव्यवहारिक समयसीमा निर्धारित की है, खासकर नवंबर 2025 में होने वाले राज्य चुनावों के पास होने के कारण। ऐसे लाखों नागरिक हैं जिनके नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं थे और जिनके पास SIR आदेश के तहत मांगे गए दस्तावेज़ नहीं हैं। जबकि कुछ लोग इन दस्तावेज़ों को प्राप्त करने में सक्षम हो सकते हैं, निर्देश द्वारा निर्धारित छोटी समयसीमा उन्हें समय पर ऐसा करने से रोक सकती है। बिहार एक ऐसा राज्य है जहां गरीबी और पलायन का उच्च स्तर है.यहां की एक बड़ी आबादी के पास जन्म प्रमाण पत्र या अपने माता-पिता के रिकॉर्ड जैसे आवश्यक दस्तावेज़ नहीं हैं।
याचिकाकर्ता ने अनुमान लगाया है कि 3 करोड़ से अधिक मतदाता, विशेष रूप से एससी, एसटी और प्रवासी श्रमिकों जैसे हाशिए के समूहों से, SIR आदेश में निर्धारित सख्त आवश्यकताओं के कारण अपने वोट के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। याचिका के अनुसार, बिहार से हाल की रिपोर्ट, जहां SIR प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, संकेत देती है कि ग्रामीण क्षेत्रों और हाशिए के समुदायों के लाखों मतदाताओं के पास उनसे मांगे जा रहे दस्तावेज़ नहीं हैं।
अब आप सोच रहे हैं होंगे कि आखिर ये SIR है क्या? जिसे लेकर इतना बवाल मचा हुआ है। ये है बिहार विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग की विशेष प्रक्रिया Special Intensive Revision,जिसे संक्षेप में SIR यानी सर कहा जा रहा है। दरअसल,स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए किसी भी चुनाव से पहले मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है जो एक सामान्य प्रक्रिया है,लेकिन चुनाव आयोग ने इस बार 1 जुलाई से मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा शुरू कर दी है। इसे लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है, नीयत पर शक़ कर रहा है।
