Jammu. आज आपको ऐसी महिला की कहानी बताते हैं जिनका संघर्ष महिला शक्ति के लिए प्रेरणादायक है। पूजा देवी एक 30 वर्षीय महिला है। जिनको जम्मू कश्मीर परिवहन विभाग ने हाल ही में बस ड्राइवर की नौकरी दी है। जिसके साथ पूजा अब जम्मू कश्मीर की पहली महिला बस ड्राइवर बन गयी है।
पूजा देवी का जन्म कठुआ जिले के संधर बसोहली गांव में हुआ था, जो जम्मू-कश्मीर के एक दुर्गम इलाके में स्थित है। उनका परिवार आर्थिक रूप से बहुत कमजोर था। उनके पिता एक किसान थे, और बचपन में ही उनका देहांत हो गया। मां ने अकेले ही पूजा और उनके भाई-बहनों (तीन बहनें और एक भाई) को पाला। शिक्षा के अभाव में पूजा को स्कूल की किताबों से ज्यादा जीवन की कठोर सच्चाइयों से रूबरू होना पड़ा। लेकिन बचपन से ही उन्हें वाहनों का शौक था। वह बताती हैं कि जब भी कोई कार या ट्रक उनके गांव से गुजरता, वह दौड़कर उसके पीछे भागतीं। सपनों में वह खुद को भारी वाहनों की स्टीयरिंग थामे देखतीं – कभी बस, कभी ट्रक, तो कभी हवाई जहाज उड़ाती हुईं।
उम्र के साथ यह शौक जुनून में बदल गया। किशोरावस्था में ही उन्होंने कार चलाना सीख लिया। लेकिन परिवार की आर्थिक तंगी ने उन्हें मजबूर किया कि वह जल्दी कमाई करें। 30 वर्ष की उम्र (लगभग 2020 के समय) में वह शादीशुदा हो चुकी थीं और तीन बच्चों (दो बेटे और एक बेटी, स्रोतों के अनुसार थोड़ा भिन्नता है) की मां बन चुकी थीं। उनके पति और ससुराल वाले शुरू में इस पेशे के खिलाफ थे ससुर ने तो स्पष्ट मना कर दिया था कि उनकी बहू ड्राइवर बनेगी। समाज की नजरें भी महिलाओं को सड़क पर भारी वाहन चलाते देखने के आदी नहीं थीं। लेकिन पूजा ने हार नहीं मानी। उन्होंने कहा मेरा परिवार मुझे पढ़ा नहीं सका, लेकिन मैंने फैसला किया कि ड्राइविंग ही मेरा करियर बनेगा।
पूजा देवी की कहानी सिर्फ एक महिला की सफलता नहीं बल्कि संघर्ष साहस और आत्मनिर्भरता की कहानी है। गरीबी से निकलकर जम्मू-कश्मीर की पहली महिला बस चालक बनना आसान नहीं था।
