लखनऊ। 2026 के पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक तैयारियों की रफ्तार बढ़ा दी है। प्रदेश में नया संगठनात्मक ढांचा अंतिम चरण में पहुंच चुका है। देर रात पार्टी ने 84 जिलों से 327 प्रदेश परिषद सदस्यों की सूची जारी कर दी। प्रदेश चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय के निर्देश पर जिलों के चुनाव अधिकारियों ने यह घोषणा की। इसके साथ ही माना जा रहा है कि यूपी भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। माना जा रहा है कि खरमास शुरू होने से पहले नया प्रदेश चार्ज संभाल सकते हैं। दरअसल, अभी प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका में भूपेंद्र सिंह चौधरी हैं और उनका कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है।
अब प्रदेश अध्यक्ष के औपचारिक चुनाव के लिए केंद्रीय चुनाव अधिकारी पीयूष गोयल के कार्यक्रम का इंतजार है। भाजपा संविधान के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में प्रदेश परिषद सदस्य, भाजपा विधानमंडल दल के सदस्यों का 10 फीसदी और यूपी कोटे के लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों का 10 फीसदी मतदाता के रूप में शामिल होंगे। यूपी में भाजपा के 258 विधायक, 79 एमएलसी, 33 लोकसभा सांसद और 24 राज्यसभा सांसद हैं।
सूत्रों के अनुसार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद पर ओबीसी नेता को आगे लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह रणनीति विपक्ष के पीडीए फार्मूले की काट मानी जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष के दावेदारों की दौर में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति, राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद का नाम खूब लिया जा रहा है। सूत्र का दावा है कि एक बड़े संगठनात्मक नेता मौजूदा पद पर रहते हुए भी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी के इच्छुक हैं।
