मणिपुर। मणिपुर में पिछले दो वर्षों से चली आ रही जातीय हिंसा ने राज्य की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया है। इस संकटपूर्ण परिस्थिति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक और नया धक्का लगा है।
उखरुल जिले के फुंग्यार विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के 43 प्रमुख पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया। यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 13 सितंबर को प्रस्तावित मणिपुर दौरे से महज दो दिन पहले घटी है, जिससे राज्य की सियासी हलचल और तेज हो गई है।
इस्तीफा देने वालों में फुंग्यार मंडल अध्यक्ष, महिला मोर्चा प्रमुख, युवा मोर्चा प्रमुख, किसान मोर्चा प्रमुख, अनुसूचित जनजाति मोर्चा के कार्यकारी सदस्य और 53 बूथ-स्तरीय अध्यक्ष शामिल हैं। इस सामूहिक कदम का नेतृत्व भाजपा मणिपुर के विशेष आमंत्रित सदस्य एनगाचॉमी रामशंग ने किया। एक जारी बयान में उन्होंने पार्टी के वर्तमान हालात पर गहरी चिंता जताई।
आरोप लगाया गया कि संगठन में जमीनी स्तर के नेताओं से कोई परामर्श नहीं होता, समावेशी दृष्टिकोण की कमी है और आधारभूत कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं किया जाता। बयान में कहा गया, “हमारी निष्ठा भाजपा और उसकी विचारधारा के प्रति अटल रही है, लेकिन अब हम अपने समुदाय व मणिपुर की जनता की भलाई के लिए समर्पित रहेंगे।” मणिपुर भाजपा ने अभी तक इन इस्तीफों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, जो पार्टी नेतृत्व की चुप्पी को दर्शाता है।
मई 2023 में मेइतेई और कuki-zo समुदायों के बीच भड़की हिंसा ने राज्य को अस्थिर कर दिया। इस संघर्ष में 260 से अधिक लोग मारे गए, जबकि हजारों विस्थापित हो चुके हैं। फरवरी 2025 में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद केंद्र ने राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया, जो अभी भी जारी है।
पीएम मोदी का यह दौरा 2023 की हिंसा के बाद उनका पहला मणिपुर दौरा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ये इस्तीफे भाजपा की हिल जिलों में संगठनात्मक कमजोरी को उजागर करते हैं, जहां नगा समुदाय का प्रभाव प्रमुख है। राज्य में शांति बहाली के प्रयासों के बीच यह घटना भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
